मातृ नवमी 2026
पितृ पक्ष में कई ऐसी तिथियां आती हैं जिनका विशेष महत्व माना जाता है। इन्हीं में से एक है मातृ नवमी। यह दिन विशेष रूप से परिवार की दिवंगत माताओं और अन्य महिला पूर्वजों को याद करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मातृ नवमी पर महिलाएं अपने परिवार की दिवंगत माताओं, दादी, नानी और अन्य महिला पूर्वजों के लिए श्राद्ध और तर्पण करती हैं।
मातृ नवमी का मुख्य भाव अपनी मातृ परंपरा के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना है। इस दिन परिवार उन महिलाओं को याद करता है जिन्होंने परिवार को संभालने, बच्चों का पालन-पोषण करने और आने वाली पीढ़ियों को संस्कार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मातृ नवमी 2026 कब है?
मातृ नवमी 2026 में 5 अक्टूबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी।
यह पितृ पक्ष की नवमी तिथि है। इस दिन विशेष रूप से दिवंगत माताओं और महिला पूर्वजों के लिए श्राद्ध किया जाता है।
मातृ नवमी के दिन श्राद्ध कर्म के लिए दोपहर का समय महत्वपूर्ण माना जाता है। कुतुप मुहूर्त, रौहिण मुहूर्त और अपराह्न काल में श्राद्ध करने की परंपरा है। हालांकि मुहूर्त का सही समय स्थान के अनुसार बदल सकता है, इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना उचित है।
मातृ नवमी का महत्व
मातृ नवमी का सबसे बड़ा महत्व यह है कि यह दिन परिवार की दिवंगत महिला पूर्वजों को समर्पित माना जाता है।
हिंदू परंपरा में मां को परिवार की आधारशिला माना गया है। मां के साथ-साथ दादी, नानी और परिवार की अन्य महिलाओं का भी परिवार के विकास में महत्वपूर्ण योगदान होता है। मातृ नवमी पर ऐसी दिवंगत महिलाओं को श्रद्धापूर्वक याद किया जाता है।
इस दिन तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान, भोजन और दान जैसे धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं। इन कार्यों का उद्देश्य पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करना है।
मातृ नवमी को किसका श्राद्ध किया जाता है?
मातृ नवमी पर मुख्य रूप से दिवंगत महिला पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है।
इनमें परिवार की:
- दिवंगत माता
- दादी
- नानी
- परदादी
- परनानी
- सास
- अन्य दिवंगत महिला पूर्वज
शामिल हो सकती हैं, हालांकि किस रिश्ते के लिए किस तिथि पर श्राद्ध किया जाए, यह परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है।
मातृ नवमी का उद्देश्य परिवार की दिवंगत महिलाओं को श्रद्धापूर्वक याद करना और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है।
मातृ नवमी की पूजा और श्राद्ध विधि
मातृ नवमी की श्राद्ध विधि परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सामान्य रूप से इस दिन निम्न कार्य किए जाते हैं।
1. सुबह स्नान करें
मातृ नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ और स्वच्छ कपड़े पहनने चाहिए।
घर और पूजा या श्राद्ध करने वाले स्थान की सफाई करनी चाहिए। इसके बाद शांत मन से दिवंगत माताओं और महिला पूर्वजों का स्मरण करना चाहिए।
2. मातृ पितरों का स्मरण करें
श्राद्ध शुरू करने से पहले दिवंगत महिला पूर्वजों को याद किया जाता है।
यदि माता या अन्य पूर्वज का नाम और गोत्र ज्ञात हो, तो परिवार की परंपरा के अनुसार उनका नाम और गोत्र लिया जा सकता है।
इस अवसर पर परिवार के सदस्य अपनी मां, दादी या नानी की अच्छी यादों को साझा कर सकते हैं। उनके जीवन और परिवार के लिए किए गए कार्यों को याद करना भी मातृ नवमी के भाव से जुड़ा है।
3. तर्पण करें
तर्पण पितृ कर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें जल अर्पित करके दिवंगत पूर्वजों का स्मरण किया जाता है।
कई परंपराओं में तर्पण के दौरान काले तिल का प्रयोग किया जाता है। तर्पण करते समय महिला पितरों की आत्मा की शांति और परिवार के कल्याण की प्रार्थना की जाती है।
तर्पण की दिशा, मंत्र और विधि परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए सही विधि की जानकारी न होने पर योग्य पुरोहित से सलाह लेना उचित है।
4. पिंडदान करें
कुछ परिवारों में मातृ नवमी के दिन पिंडदान करने की परंपरा होती है। पिंड सामान्य रूप से चावल आदि से बनाए जाते हैं और धार्मिक विधि के अनुसार पितरों को अर्पित किए जाते हैं।
पिंडदान की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती है। विशेष पिंडदान के लिए पुरोहित का मार्गदर्शन लिया जा सकता है।
5. सात्विक भोजन बनाएं
मातृ नवमी के दिन पितरों के निमित्त सात्विक भोजन तैयार किया जाता है।
परिवार की परंपरा के अनुसार चावल, दाल, सब्जी, रोटी, खीर और अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाए जा सकते हैं।
कई परिवार श्राद्ध भोजन में प्याज और लहसुन का प्रयोग नहीं करते। हालांकि भोजन के नियम क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं।
भोजन बनाते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
6. ब्राह्मण भोजन कराएं
कई परिवारों में श्राद्ध के बाद ब्राह्मण को भोजन कराने की परंपरा है। भोजन श्रद्धा और स्वच्छता के साथ तैयार किया जाता है।
भोजन के बाद अपनी क्षमता के अनुसार दक्षिणा देने की परंपरा भी है। दक्षिणा के साथ अनाज, वस्त्र या उपयोगी सामग्री दी जा सकती है।
7. कौए को भोजन दें
पितृ पक्ष में कौए को भोजन कराने की परंपरा बहुत प्रचलित है। धार्मिक मान्यता में कौए को पितरों से संबंधित माना जाता है।
इसलिए श्राद्ध भोजन का कुछ हिस्सा कौए के लिए रखा जाता है। कई परिवार गाय और अन्य जीवों को भी भोजन कराते हैं।
यह कार्य जीवों के प्रति दया और सेवा की भावना को भी दर्शाता है।
8. जरूरतमंदों को भोजन कराएं
मातृ नवमी के दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी अच्छा माना जाता है।
किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, अनाज, कपड़े या दैनिक उपयोग की वस्तुएं दी जा सकती हैं।
दान करते समय दिखावे के बजाय सेवा की भावना रखनी चाहिए।
मातृ नवमी में तर्पण का महत्व
मातृ नवमी पर तर्पण के माध्यम से दिवंगत महिला पूर्वजों को याद किया जाता है। जल अर्पित करते समय उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।
मां या परिवार की किसी महिला पूर्वज के निधन के बाद उनकी यादें परिवार के साथ बनी रहती हैं। मातृ नवमी उन यादों को सम्मान देने का अवसर भी देती है।
तर्पण की सही विधि परिवार की परंपरा के अनुसार करनी चाहिए।
मातृ नवमी में पिंडदान
कुछ परिवार मातृ नवमी पर महिला पितरों के लिए पिंडदान करते हैं। पिंड बनाकर धार्मिक विधि के अनुसार उन्हें अर्पित किया जाता है।
पिंडदान की विधि में परिवार और क्षेत्र के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए यदि किसी विशेष प्रकार का पिंडदान करना है, तो योग्य पुरोहित से मार्गदर्शन लेना बेहतर है।
मातृ नवमी में दान का महत्व
पितृ पक्ष में दान को महत्वपूर्ण माना जाता है। मातृ नवमी पर भी व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता कर सकता है।
भोजन, अनाज, वस्त्र और दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं दान की जा सकती हैं।
किसी जरूरतमंद महिला की सहायता करना भी इस दिन सेवा की भावना से जुड़ा एक अच्छा कार्य हो सकता है।
दान कितना बड़ा है, इससे अधिक महत्वपूर्ण दान के पीछे की भावना है।
मातृ नवमी में कौन सा भोजन बनाया जाता है?
मातृ नवमी के श्राद्ध भोजन में सामान्य रूप से सात्विक व्यंजन बनाए जाते हैं।
चावल, दाल, सब्जी, रोटी, खीर और अन्य पारंपरिक भोजन परिवार की परंपरा के अनुसार तैयार किए जा सकते हैं।
कुछ परिवार अपनी दिवंगत मां या दादी की पसंद का कोई सात्विक भोजन भी बनाते हैं। हालांकि धार्मिक नियमों का पालन परिवार की परंपरा के अनुसार किया जाना चाहिए।
भोजन बनाते समय साफ-सफाई और शुद्धता का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।
मातृ नवमी पर क्या नहीं करना चाहिए?
मातृ नवमी के दिन कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- दिवंगत माताओं और महिला पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें।
- अनावश्यक क्रोध और विवाद से बचें।
- श्राद्ध कर्म में दिखावा न करें।
- भोजन की बर्बादी न करें।
- श्राद्ध स्थल को साफ रखें।
- अपनी क्षमता के अनुसार दान करें।
- जरूरतमंदों की सहायता करें।
- परिवार की परंपरा का सम्मान करें।
- विशेष अनुष्ठान के लिए योग्य पुरोहित से सलाह लें।
- स्थानीय पंचांग के अनुसार श्राद्ध का समय देखें।
इस दिन का मुख्य उद्देश्य श्रद्धा और स्मरण है।
मातृ नवमी और अन्य श्राद्धों में अंतर
पितृ पक्ष में प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक अलग-अलग तिथियों पर श्राद्ध किए जाते हैं। लेकिन कुछ तिथियां विशेष कारणों से महत्वपूर्ण होती हैं।
मातृ नवमी का मुख्य संबंध दिवंगत महिला पूर्वजों से है। वहीं सर्वपितृ अमावस्या पर सभी ज्ञात और अज्ञात पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है।
इसी तरह चतुर्दशी श्राद्ध विशेष मृत्यु परिस्थितियों से जुड़ी परंपराओं के लिए जाना जाता है और द्वादशी का संबंध कुछ परंपराओं में संन्यासी श्राद्ध से होता है।
मातृ नवमी 2026: पितृ पक्ष का क्रम
2026 में पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध की प्रमुख तिथियां क्रम से आगे बढ़ेंगी:
- 26 सितंबर – पूर्णिमा श्राद्ध
- 27 सितंबर – प्रतिपदा श्राद्ध
- 28 सितंबर – द्वितीया श्राद्ध
- 29 सितंबर – तृतीया श्राद्ध
- 30 सितंबर – चतुर्थी श्राद्ध
- 1 अक्टूबर – पंचमी श्राद्ध
- 2 अक्टूबर – षष्ठी श्राद्ध
- 3 अक्टूबर – सप्तमी श्राद्ध
- 4 अक्टूबर – अष्टमी श्राद्ध
- 5 अक्टूबर – मातृ नवमी
- इसके बाद दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी और चतुर्दशी श्राद्ध होंगे।
- 10 अक्टूबर – सर्वपितृ अमावस्या
इस प्रकार मातृ नवमी पितृ पक्ष के मध्य में आने वाली एक महत्वपूर्ण तिथि है।
घर पर मातृ नवमी कैसे मनाएं?
मातृ नवमी पर घर में सरल तरीके से पितृ स्मरण किया जा सकता है।
सबसे पहले घर और पूजा स्थान की सफाई करें। सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। दिवंगत माता या महिला पूर्वजों को याद करें।
परिवार की परंपरा के अनुसार तर्पण करें। पितरों के निमित्त सात्विक भोजन तैयार करें। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं और अपनी क्षमता के अनुसार दान करें।
यदि परिवार में विशेष श्राद्ध विधि की परंपरा है, तो उसी के अनुसार कर्म करना चाहिए। विशेष तर्पण या पिंडदान के लिए योग्य पुरोहित की सहायता ली जा सकती है।
मातृ नवमी का भावनात्मक और पारिवारिक महत्व
मातृ नवमी केवल श्राद्ध की एक तिथि नहीं है। यह परिवार की उन महिलाओं को याद करने का अवसर है जिन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा परिवार की देखभाल में लगाया।
बच्चे और परिवार के युवा सदस्य इस दिन अपनी दिवंगत मां, दादी या नानी के बारे में जान सकते हैं। परिवार के बुजुर्ग उनकी कहानियां और यादें साझा कर सकते हैं।
इससे परिवार की पुरानी यादें और संस्कार अगली पीढ़ी तक पहुंचते हैं।
मातृ नवमी हमें यह भी याद दिलाती है कि परिवार का निर्माण केवल एक व्यक्ति से नहीं होता। परिवार की महिलाओं का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
मातृ नवमी 2026: एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
| पर्व | मातृ नवमी |
| वर्ष | 2026 |
| तारीख | 5 अक्टूबर 2026 |
| दिन | सोमवार |
| तिथि | नवमी |
| पक्ष | पितृ पक्ष |
| मुख्य उद्देश्य | दिवंगत माताओं और महिला पूर्वजों का स्मरण |
| मुख्य कर्म | श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, भोजन और दान |
| विशेष महत्व | मातृ पितरों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता |
| पितृ पक्ष का अंतिम दिन | 10 अक्टूबर 2026 – सर्वपितृ अमावस्या |
निष्कर्ष
मातृ नवमी 2026 में 5 अक्टूबर, सोमवार को मनाई जाएगी। यह पितृ पक्ष की एक महत्वपूर्ण तिथि है, जिस दिन परिवार की दिवंगत माताओं और महिला पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है।
इस दिन परिवार की परंपरा के अनुसार तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान, सात्विक भोजन, ब्राह्मण भोजन, कौए को भोजन और दान जैसे कार्य किए जा सकते हैं। श्राद्ध की विधि परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है, इसलिए विशेष धार्मिक कर्म के लिए योग्य पुरोहित से मार्गदर्शन लेना उचित है।
मातृ नवमी का सबसे महत्वपूर्ण संदेश मां और महिला पूर्वजों के प्रति सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता है। इस दिन अधिक खर्च या दिखावे की आवश्यकता नहीं है। सच्ची श्रद्धा से अपनी दिवंगत माताओं को याद करना, उनके अच्छे कार्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना और जरूरतमंदों की सहायता करना इस दिन के भाव को सार्थक बनाता है।
